
हनुमान जी की महिमा अनंत है। वे केवल शक्ति और पराक्रम के देवता नहीं, बल्कि भक्ति, सेवा, और समर्पण के प्रतीक भी हैं। जब भी भक्त संकट में होते हैं, वे बजरंगबली को पुकारते हैं, और हनुमान जी तुरंत उनकी सहायता के लिए उपस्थित होते हैं। लेकिन उनके जीवन से जुड़े कई रहस्य और परंपराएँ हैं, जो भक्तों के मन में जिज्ञासा उत्पन्न करती हैं। विशेष रूप से हनुमान जयंती से जुड़े कुछ प्रश्न सदैव चर्चा में रहते हैं। आइए, आज उन रहस्यों को समझते हैं और हनुमान जी की कृपा प्राप्त करते हैं।
हनुमान जयंती क्यों मनाई जाती है?
हनुमान जी केवल एक शक्ति के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे भक्ति, सेवा, और निःस्वार्थ प्रेम के भी सजीव उदाहरण हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण कैसे किया जाए। हनुमान जयंती मनाने का मुख्य उद्देश्य यही है कि भक्त उनके गुणों को आत्मसात करें। इस दिन हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, बजरंग बाण का पाठ करने का विशेष महत्व है। कई भक्त उपवास रखते हैं और दान-पुण्य करते हैं। मंदिरों में भंडारे और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। यह दिन हमें हनुमान जी की अनन्य भक्ति और उनकी प्रभु श्रीराम के प्रति अविचल निष्ठा को स्मरण करने का अवसर प्रदान करता है।
हनुमान जी का जन्म दो बार क्यों मनाया जाता है?
हनुमान जी अमर हैं। वे काल और समय के बंधनों से परे हैं। लेकिन उनके जन्म को लेकर दो अलग-अलग मान्यताएँ प्रचलित हैं। कुछ शास्त्रों के अनुसार, उनका शारीरिक जन्म चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को माता अंजनी के गर्भ से हुआ था। लेकिन कुछ अन्य ग्रंथों में वर्णन है कि कार्तिक मास में वे अपने दिव्य स्वरूप में प्रकट हुए और रामकथा में प्रवेश किया। इस कारण कुछ लोग कार्तिक मास की चतुर्दशी को भी उनकी जयंती मानते हैं। यह भी कहा जाता है कि चैत्र मास में वे पृथ्वी पर जन्मे, लेकिन कार्तिक में उन्होंने अपने ईश्वरीय कार्यों का शुभारंभ किया। दोनों ही मान्यताएँ अपनी-अपनी जगह पर सही हैं, और भक्तों को अपने श्रद्धा भाव के अनुसार हनुमान जी की आराधना करनी चाहिए।
असली हनुमान जयंती कब है?
अगर हम शास्त्रों और पुराणों की मानें, तो हनुमान जी का प्राकट्य चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को हुआ था। इस दृष्टि से उत्तर भारत में मनाई जाने वाली हनुमान जयंती को ही उनका वास्तविक जन्मोत्सव माना जाता है। यह इस वर्ष 12 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी। हालांकि, भक्तों के लिए असली हनुमान जयंती वही होती है, जब वे श्रद्धा और भक्ति से उनका स्मरण करते हैं। भक्ति का कोई दिन निश्चित नहीं होता, और जब भी कोई भक्त सच्चे मन से हनुमान जी की आराधना करता है, वह दिन उसके लिए जयंती से कम नहीं होता।
कलियुग में हनुमान जी कहाँ हैं?
हनुमान जी को चिरंजीवी होने का वरदान प्राप्त है। वे आज भी इस पृथ्वी पर विद्यमान हैं और कलियुग के अंत तक रहेंगे। यह प्रश्न सदैव भक्तों के मन में रहता है कि वे कहाँ हैं? शास्त्रों में कहा गया है कि वे हिमालय की गुफाओं, जंगलों और श्रीराम के दिव्य मंदिरों के आसपास निवास करते हैं। कई सिद्ध पुरुषों और भक्तों ने अपने अनुभवों में बताया है कि जब भी सच्चे मन से कोई हनुमान जी का स्मरण करता है, वे तुरंत सहायता के लिए उपस्थित होते हैं।
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हनुमान जी केवल भौतिक रूप से किसी स्थान पर सीमित नहीं हैं। वे भक्तों के हृदय में निवास करते हैं। जब भी कोई भक्त संकट में “जय बजरंगबली” पुकारता है, हनुमान जी वहीं प्रकट होते हैं। इसलिए, हनुमान जी को पाने के लिए किसी विशेष स्थान की आवश्यकता नहीं, बल्कि सच्ची भक्ति और श्रद्धा की जरूरत होती है। वे वहीं होते हैं, जहाँ राम नाम का कीर्तन होता है, जहाँ सेवा और परोपकार किया जाता है, जहाँ प्रेम और भक्ति का भाव प्रबल होता है।
हनुमान जयंती केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अपने जीवन को सच्ची भक्ति, सेवा और निःस्वार्थ प्रेम की राह पर चलाने का संकल्प लेने का अवसर है। यदि भक्त सच्चे मन से हनुमान जी की आराधना करता है और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाता है, तो बजरंगबली का आशीर्वाद सदैव उसके साथ बना रहता है।
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