
हनुमान जयंती, जो भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है, इस वर्ष शनिवार, 12 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि का आरंभ 12 अप्रैल को प्रातः 3:21 बजे होगा और इसका समापन 13 अप्रैल को प्रातः 5:51 बजे होगा।
हनुमान जयंती का दिन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भक्ति, शक्ति और आत्मशुद्धि का एक महान अवसर है। यह वह दिन है जब भक्त अपने आराध्य संकटमोचन हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए विशेष अनुष्ठान, पूजा, व्रत, और सेवा करते हैं। यह पर्व हमें हनुमान जी के गुणों—अखंड बल, असीम भक्ति, अद्भुत पराक्रम और पूर्ण समर्पण—को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है। जो भी इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ हनुमान जी की आराधना करता है, उसके जीवन के सारे संकट खुद-ब-खुद दूर हो जाते हैं। लेकिन सही विधि और सच्चे मन से पूजा करना ही सबसे महत्वपूर्ण होता है। अगर आप चाहते हैं कि हनुमान जी का आशीर्वाद जीवनभर बना रहे, तो इस दिन कुछ महत्वपूर्ण बातों को अपनाना और कुछ गलतियों से बचना बेहद जरूरी है।
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए यह पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम होता है। स्नान के बाद मंदिर में दीप जलाएं और संकल्प लें कि पूरा दिन भक्ति, सेवा और व्रत में बिताया जाएगा। इस दिन मांसाहार, मदिरा, क्रोध और नकारात्मक विचारों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए, क्योंकि हनुमान जी को पवित्रता सबसे अधिक प्रिय है। उनके भक्तों को चाहिए कि वे इस दिन अपने आचरण को बिल्कुल पवित्र रखें और अपने मन में किसी के प्रति भी द्वेष या ईर्ष्या का भाव न आने दें। शुद्धता का पालन करना ही सच्ची भक्ति का प्रमाण है।
इसके बाद घर के मंदिर में या किसी हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए यह सबसे प्रभावशाली स्तोत्र माना जाता है। 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी प्रकार के भय, रोग और कष्ट दूर हो जाते हैं। सुंदरकांड का पाठ करना भी बहुत लाभकारी होता है, क्योंकि इसमें श्री हनुमान जी के अद्भुत पराक्रम और भक्ति का विस्तार से वर्णन मिलता है। यदि संभव हो तो “ॐ हं हनुमते नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें, यह भक्त के जीवन में अद्भुत शक्ति और आत्मविश्वास लाता है। यदि कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार के मानसिक या शारीरिक कष्ट से जूझ रहा है, तो इस दिन मंत्र जाप करने से उसे विशेष लाभ मिलता है।
हनुमान जी को प्रिय भोग अर्पित किए बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। इस दिन उन्हें गुड़-चना, बेसन लड्डू, बूंदी, केला और पान का भोग चढ़ाना चाहिए। हनुमान जी को विशेष रूप से सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करने से समस्त ग्रहदोष समाप्त हो जाते हैं और व्यक्ति के जीवन में चल रही परेशानियां धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैं। एक और महत्वपूर्ण बात—हनुमान जी को चढ़ाया गया प्रसाद पहले गाय, बंदर या ब्रह्मचारी बालकों को देना चाहिए, फिर स्वयं ग्रहण करें। ऐसा करने से भोग का फल कई गुना बढ़ जाता है।
लेकिन भक्ति केवल पूजा तक ही सीमित नहीं होती। हनुमान जी को केवल शक्ति और भक्ति का प्रतीक मानना सही नहीं होगा, वे सेवा, परोपकार और समर्पण के भी प्रतीक हैं। इसलिए, इस दिन किसी भी गरीब, जरूरतमंद या असहाय व्यक्ति की सहायता जरूर करें। भोजन, वस्त्र, धन, या अन्य जरूरी चीजों का दान करें और जितना संभव हो, पशु-पक्षियों के लिए भी दाना-पानी रखें। हनुमान जी के भक्त होने का असली प्रमाण तब मिलता है जब हम उनकी तरह दूसरों की सेवा करते हैं। हनुमान जी ने कभी भी अपने बल और बुद्धि का उपयोग केवल अपने लाभ के लिए नहीं किया, बल्कि उन्होंने सदैव परोपकार को ही अपना उद्देश्य बनाया। उनके भक्तों को भी चाहिए कि वे इसी मार्ग का अनुसरण करें और समाज के कल्याण के लिए कार्य करें।
शाम के समय, घर के मंदिर में लाल ध्वज स्थापित करें, जिस पर “जय श्री राम” अंकित हो। यह न केवल नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है, बल्कि घर में सुख-शांति और समृद्धि भी लाता है। यह ध्वज हनुमान जी के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक होता है और इससे भक्त को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन हनुमान जी के भजन और आरती करना भी बहुत शुभ माना जाता है। “जय हनुमान ज्ञान गुन सागर…” भजन गाएं और पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दें। यदि परिवार या मित्रों के साथ मिलकर हनुमान जी की कथा का आयोजन किया जाए, तो उसका फल कई गुना बढ़ जाता है। हनुमान जी के जीवन से जुड़ी कथाओं को सुनने और सुनाने से भक्तों में नई ऊर्जा का संचार होता है और उनकी भक्ति और भी प्रबल हो जाती है।
लेकिन इस दिन कुछ सावधानियां रखना भी बहुत आवश्यक होता है। हनुमान जयंती के दिन मांसाहार और मदिरा का सेवन वर्जित होता है। क्रोध, झूठ और परनिंदा से बचना चाहिए, क्योंकि ये सारी बातें भक्ति के मार्ग में बाधक बनती हैं। किसी भी गरीब या असहाय व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए, बल्कि उसकी सहायता करनी चाहिए। पति-पत्नी का संसर्ग इस दिन वर्जित माना जाता है, क्योंकि यह दिन पूर्णतः ब्रह्मचर्य का पालन करने के लिए होता है। इसके अलावा, हनुमान जी के मंदिर में कभी भी तुलसी के पत्ते न चढ़ाएं, क्योंकि यह वर्जित होता है।
रात्रि में सोने से पहले, हनुमान जी के चरणों में सिर झुकाएं और एक अंतिम प्रार्थना करें— “हे बजरंगबली! हमें आपकी भक्ति, शक्ति और संकल्प शक्ति प्रदान करें। हमें सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें।” जब भक्त सच्चे मन से हनुमान जी का स्मरण करता है, तो वे उसे कभी निराश नहीं करते। वे अपने भक्तों के सभी संकटों को हर लेते हैं और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करते हैं। हनुमान जयंती केवल एक पर्व नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा है, जो हमें बल, बुद्धि, भक्ति और परोपकार का सही मार्ग दिखाती है।
जो भी इस दिन पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ बजरंगबली की आराधना करता है, उसे जीवनभर संकटमोचन हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है। उनकी कृपा से जीवन के समस्त संकट समाप्त हो जाते हैं और व्यक्ति सफलता की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करता है। इसलिए, इस दिन को केवल एक पर्व की तरह न मनाएं, बल्कि इसे एक अवसर मानें अपने जीवन को बेहतर बनाने का, अपने अंदर भक्ति और सेवा की भावना को और अधिक मजबूत करने का। हनुमान जी का आशीर्वाद उन्हीं को प्राप्त होता है, जो उनके बताए मार्ग पर चलते हैं और समाज की भलाई के लिए कार्य करते हैं। यदि आप सच्चे मन से इस दिन को मनाएंगे, तो निश्चित ही हनुमान जी की कृपा आपको प्राप्त होगी और आपका जीवन सुख, शांति और समृद्धि से भर जाएगा।
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